सोमवार, 18 फ़रवरी 2013


आज लोग अपने जीवन से लेकर सामाजिक जीवन में जो चुनौतियां झेलते हैं, वे विवेकानंद की परेशानियों के मुकाबले एक रत्ती भी नहीं हैं. उनके शरीर को व्याधिमंदिरमकहा गया. जब तक वह जीये, बीमारियों से जूझे. उन्हें दो बड़ी बीमारियां तो वंशगत मिलीं. कहें, तो विरासत में. पहला मधुमेह और दूसरा हृदय रोग. अचानक पिता के न रहने के बाद से हमेशा ही उनके सिर में तेज दर्द की समस्या रही. उस दर्द से राहत पाने के लिए वह कपूर सूंघते थे. कहते हैं कि पूरे जीवन में उन्हें 31 बीमारियां हुईं. इनमें हृदय रोग, मधुमेह, दमा, पथरी, किडनी की समस्या, अनिद्रा, स्नायु रोग या न्यूरोस्थेनिया, लिवर संबंधी बीमारी, डायरिया, टाइफॉयड, टॉनसिल, सिर का तेज दर्द, मलेरिया, सर्दी-खांसी, विभिन्न प्रकार के बुखार, बदहजमी, पेट में पानी जमना, डिस्पेप्सिया, लाम्बेगो या कमर दर्द, गर्दन का दर्द, ब्राइट्स डिजीज, ड्रॉप्सी या पैर का फूलना, एल्बूमिनियूरिया, रक्तिम नेत्र, एक नेत्र की ज्योति का चले जाना, असमय बाल व दाढ़ी का सफेद होना, रात को भोजन के बाद गरमी का तीव्र अनुभव, गरमी सहन न कर पाना, जल्द थकना, सी सिकनेस व सन स्ट्रोक शामिल हैं.


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