रविवार, 12 जनवरी 2014


 "भारत को समाजवादी अथवा राजनीतिक विचारों से प्लावित करने के पहले आवश्यक है कि उसमें आध्यात्मिक विचारों की बाढ़ ला दी जाय। सर्वप्रथम, हमारे उपनिषदों, पुराणों और अन्य सब शास्त्रों में जो अपूर्व सत्य छिपे हुए हैं, उन्हें इन सब ग्रन्थों के पन्नों से बाहर निकालकर, मठों की चहारदीवारियों को भेदकर, वनों की शून्यता से दूर लाकर, कुछ सम्प्रदाय-विशेषों के हाथों से छीनकर देश में सर्वत्र बिखेर देना होगा, ताकि ये सत्य दावानल के समान सारे देश को चारों ओर से लपेट लें- उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक सब जगह फैल जायें- हिमालय से कन्याकुमारी तक और सिन्धु से ब्रह्मपुत्र तक सर्वत्र वे धधक उठें, सबसे पहले हमें यही करना होगा।"  

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें